Friday, 13 May 2016

Swatantra Jain Chintan, May, 2016 issue





































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  1. जैन धम²Rव" केसबसे ाचीन दश²न या धमÄ म¶सेएक ह।ै यह भारत क‚ मण पर रा सेRनकला तथा इसके वत²क ह¹24
    तीथËकर, Vजनम¶ थम तीथËकर भगवान ऋषभदेव (आQदनाथ) तथा अंRतम व मखु महावीर Ôवामी ह।¹ जो 'Vजन' के अनुयायी
    हÂ उÇह¶'जैन' कहतेह।¹ 'Vजन' शÊद बना हैसंÔकृत के'Vज' धातुसे।Vज' माने- जीतना। 'Vजन' मानेजीतनेवाला। VजÇहÂनेअपने
    मन को जीत Tलया, अपनी तन मन वाणी को जीत Tलया और RवTश% आÃम±ान को पाकर सव²± या पूण±² ान ाÈत Rकया उन
    आÈत पुšष को VजनेÇ
    या Vजन कहा जाता ह'ै। जैन धम²अथात² 'Vजन' भगवान्का धम।²
    जैन धम²के 24व¶तीथËकर भगवान महावीर के जÇमQदवस को आज महावीर जयंती के नाम सेजाना जाता ह।ै जैन समाज
    ारा पूरेभारत म¶भगवान महावीर के जÇम उÃसव के›प मे'महावीर जयंती' मनाई जाती ह।ै महावीर जयंती केसाथ-साथ
    इस Qदन को महावीर जÇमकÏयाणक नाम सेके भी जाना जाता ह।ै च ै माह के 13व¶Qदन यानी च ै शु´ल योदशी को जैन
    Qदगंबर और "ते ांबर एकसाथ Sमलकर इस उÃसव को मनातेह।¹ भगवान महावीर का जÇम करीब ढाई हजार वष²पहले(ईसा
    से599 वष²पूव²), वैशाली के गणतÇ रा»य °R य कुÂडलपुर म¶Œआ था। उनके माता-Rपता जैन धम²के 23व¶तीथËकर
    पा"न² ाथ (पा"न² ाथ महावीर से250 वष²पूव²Œए थे) के अनुयायी थे। महावीर जब Tशशुअव+ा म¶थे, तब इÇ
    Â और देवÂ ने
    उÇह¶सुम›े पव²त पर लेजाकर भुका जÇमकÏयाणक मनाया। जब वेबालक थेतो सुमšे पव²त पर इं
    देवता उनका
    जलाUभषेक कर रहेथेलेRकन वेघबरा गयेRक कह­ बालक बह न जायेइसTलयेउÇहÂन¶जलाUभषेक šकवा Qदया. कहा जाता
    हैRक भगवान महावीर नेइं
    के मन के भय को भापं Tलया और अंगूठेसेपव²त को दबाया तो पव²त कांपनेलगा. यह सब
    देखकर देवराज इं
    नेजलाUभषेक तो Rकया ही साथी उÇह¶वीर के नाम सेभी संबोSधत Rकया।महावीर Ôवामी का बचपन
    राजमहल म¶बीता| तीस वष²क‚ आयुम¶महावीर नेसंसार सेRवरã होकर राज वैभव Ãयाग Qदया और संÇयास धारण कर
    आÃमकÏयाण के पथ पर Rनकल गये। 12 वषà क‚ कQठन तपÔया के बाद उÇह¶केवल±ान ाÈत Œआ Vजसके प!ात्उÇहÂने
    समवशरण म¶±ान साPरत Rकया। 72 वष²क‚ आयुम¶उÇह¶पावापुरी सेमो° क‚ ाXÈत Œई। इस दौरान महावीर Ôवामी के कई
    अनुयायी बनेVजसम¶उस समय के मखु राजा RबYÌबसार, कुRनक और चटे क भी शाSमल थे। जैन समाज ारा महावीर Ôवामी
    के जÇमQदवस को महावीर-जयंती तथा उनके मो° Qदवस को द€पावली के›प म¶धमू धाम सेमनाया जाता ह।ै ^हसा, पशुबTल,
    जात-पात का भदे -भाव Vजस युग म¶बढ़ गया, उसी युग म¶भगवान महावीर का जÇम Œआ। उÇहÂनेœRनया को सÃय, अ^हसा का
    पाठ पढ़ाया। उÇहÂनेœRनया को जैन धम²के पंचशील Tस ातं बताए, जो ह–ै अ^हसा, सÃय, अपPरýह, अचौय²(अÔतेय) और
    3चय²। उÇहÂनेअनेकांतवाद, Ôयादवाद और अपPरýह जैसेअ³तु Tस ाÇत Qदए।महावीर का 'जीयो और जीनेदो' का
    Tस ाÇत ह,¹जो आज के युग म¶बŒत ज›री हो गया ह।ै भगवान महावीर केसमय पर ही अलग अलग घटनाÓ केRहसाब से
    देव ारा वीर, अRतवीर, वधम² ान, सÇमRत नाम भी Qदया गया।मRुन अव+ा म¶सप² ारा उÇह¶काटेजानेपर उनके पेर सेध
    बहना, उसेसंबोSधत करना जैसी बŒत सारी घटनाएंह।ैबाÏयकाल के ही एक और चमÃकार को बताया जाता हैRक एक बार वे
    महल केआंगन म¶खेल रहेथेतो संजय और Rवजय नामक मRुन सÃय और असÃय का भदे नह­ समझ पा रहेथे. इसी रहÔय
    को जाननेकेTलयेदोन आसमान म¶उड़तेŒए जा रहेथेRक उनक‚ नजर Qद शTãय सेयुã महल केआंगन म¶खेल रहे
    बालक पर पड़ी. उÇहÂनेजैसेही बालक के दश²न Rकयेउनक‚ तमाम शंकाÓ का समाधान Œआ. दोन मRुनय नेउÇह¶सÇमRत
    नाम सेपुकारा।एक और वा´या अ´सर उनके पराûम क‚ गाथा कहता हैएक बार वेबचपन म¶अपनेकुछ साTथयÂ केसाथ
    खेल रहेथेएक बड़ा ही भयानक फनधारी सांप वहांQदखाई Qदया, उस मौत को अपनेसर पर खड़ा देखकर सभी भय से
    कांपनेलगे, VजÇह¶मौका Sमला वेभाग खड़ेŒए लेRकन वधम² ान महावीर अपनी जगह सेएक इंच नह­ Rहले, न ही उनके मन म¶
    Rकसी तरह को कोई भय था. जैसेही सांप उनक‚ तरफ बढा तो वेतुरतं उछल कर सांप केफन पर जा बैठे. उनके भार सेसांप
    को अपनी जान केलालेपड़ गयेतभी एक चमÃकार Œआ और सांप नेसुंदर देव का šप धारण कर Tलया और माफ‚ मागं तेŒए
    कहा Rक, ' भुम¹आपके पराûम को सुनकर ही आपक‚ परी°ा लेनेपंŒचा था मझु ेमाफ कर.¶आप वीर नह­ बZÏक वीर के
    वीर अRतवीर ह'¹।इÇह­ कारणÂ सेमाना जाता हैRक वधम² ान महावीर के वीर, सÇमRत, अRतवीर आQद नाम भी Tलयेजातेह.¹
    " जय VजनेÇ
    "
    सौरभ जैन मरुनैा रोड, Rतराहा अंबाह (मरुनैा)

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